बुधवार को वाल स्ट्रीट जॉरनल ने रिपोर्ट दी थी कि 14000 अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती के साथ ही पेंटागन दर्जनों युद्धपोत मध्यपूर्व के लिए रवाना करने जा रहा है।
अख़बार ने दावा किया था कि अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प शीघ्र ही अमरीकी सैनिकों की तैनाती के बारे में अंतिम निर्णय ले सकते हैं।
लेकिन पेंटागन ने इस रिपोर्ट को ख़ारिज करते हुए कहा है कि स्पष्ट रूप से यह रिपोर्ट ग़लत है। अमरीका मध्यपूर्व के लिए 14000 अतिरिक्त सैनिक नहीं भेजेगा।
ग़ौरतलब है कि क्षेत्र में ईरान और अमरीकी सहयोगियों के बीच तनाव में वृद्धि को देखते हुए काफ़ी दिनों से मध्यपूर्व में एक नए और बड़े युद्ध की अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि अमरीकी अधिकारियों ने ईरान के साथ ऐसे कि भी युद्ध की संभावना से साफ़ इनकार किया है।
इस बीच, ईरानी अधिकारियों का कहना है कि तेहरान हर ख़तरे का मुक़ाबला करने के लिए तैयार है और अगर उस पर हमला किया गया तो मध्यपूर्व में मौजूद अमरीकी सैनिकों को जान बचाकर भागने का भी मौक़ा नहीं मिलेगा।
सितम्बर में सऊदी तेल प्रतिष्ठानों पर भीषण हवाई हमलों के बाद, अमरीका ने सऊदी अरब में अपने सैनिकों की संख्या बढ़ाने का फ़ैसला किया था।
उसके बाद, नवम्बर में अमरीकी विमान वाहक युद्धपोत स्ट्रेट ऑफ़ होरमुज़ से होकर गुज़रा था, ताकि वाशिंगटन के सहयोगी फ़ार्स खाड़ी के अरब देशों की बढ़ती चिंताओं को कुछ कम किया जा सके।
बुधवार को पेंटागन के एक अधिकारी ने दावा किया था कि इस बात के संकेत मिले हैं कि ईरान भविष्य में क्षेत्र में कोई बड़ा हमला कर सकता है।
पेंटागन के तीसरे नम्बर के अधिकारी जॉन रूड का कहना था कि हमें इस तरह के संकेत मिल रहे हैं कि ईरान बड़ा हमला कर सकता है, लेकिन स्पष्ट कारणों के मद्देनज़र मैं इसके बारे में अधिक जानकारी नहीं दे सकता।
अल-जज़ीरा की रिपोर्ट के मुताबिक़, दो अमरीकी अधिकारियों ने नाम नहीं बताने की शर्त पर दावा किया है कि पिछले महीने ईरान ने क्षेत्र में सैनिकों और हथियारों को स्थानांतरण किया है।
अमरीकी अधिकारियों का यह भी कहना था कि ईरानी बलों और हथियारों की आवाजाही से स्पष्ट नहीं है कि किस मक़सद के लिए ईरान ऐसा कर रहा है।
हालांकि अमरीकी अधिकारियों के इस तरह के दावों पर तेहरान ने किसी तरह की कोई प्रतिक्रिया ज़ाहिर नहीं की है।